Tuesday, December 14, 2010

केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने सोमवार को विवोदास्पद बयान दिया और तुरंत अपना बयान वापस लेते हुए अपने आप को प्रवासी भी बताया / खैर गलती इंसान कि फितरत बन कर घर कर गई है / और यह बढती ही जा रही है / एक दबे हुए इंसान को ही दबाया जाता है / चिदम्बरम के बयान ने क्षेत्रवाद कि राजनीति करनेवालों के लिए आग में घी का काम किया है / बाल ठाकरे और राज ठाकरे जैसे नेताओ को एक और जुबान दी है / जिससे वह क्षेत्रवाद और भाषावाद कि राजनीति करते है / कहने को ग्लोबेलाइजेशन का दौर है लेकिन वास्तविकता उसके विपरीत है / क्षेत्रवाद का ही तो रूप है कि नेता राज सत्ता के लिए राज्यों का बत्वार करना चाहते है / और तर्क देते है कि इससे विकास होगा / विकास और अशितत्व कि या लोग बात करते है और खुद प्रदेश के अशितत्व को भूल जाते है / क्योकि इनका अपना ही अशितत्व नहीं है

Saturday, July 24, 2010

सैनिक और जार

रूस के सम्राट जार निकोलस रात को भेष बदलकर अपने प्रजा के दुखो को देखते और उन्हें दूर करते थे / एक रात उन्होंने सैनिक चौकी में एक सैनिक को टेबल पर सिर रख कर सोते देखा / उसके सामने एक कागज पर लाखो रुपये के हिसाब थे / जिस पर लिखा था " मेरा क़र्ज़ कौन चुकाएगा "/ जार निकोलस ने उसके नीचे हस्ताक्षर किये और लिखा 'मैं चुकौऊगा " अगर जार सैनिक को सोता देख कर उसे सजा देता तो वह न्याय नहीं होता / लेकिन जार ने सैनिक के क़र्ज़ को चूकाकर उसे दुखो से छुटकारा दिलाया / आज कर्मचारियों के लिए विभिन्न तरह के नियम बनाये गए है /क्या मालिक अपने कर्मचारियों कि मानसिक परेशानियों को समझने कि कोशिश करते है / या लाभ प्राप्ति /कार्य प्रणाली ८ घंटे निर्धारित कि गई है , लेकिन मजदूर ठेकेदारी , प्राइवेट सिक्योरिटी व्यवस्था में १२ घंटे कार्य कर रहे है / तब भी उन्हें पूर पारिश्रमिक नही मिल रहा है / प्राइवेट सिक्योरिटी व्यवस्था थोपने वाली सरकार को वास्तविकता का पता नहीं है कि प्राइवेट सिक्योरिटी व्यवस्था कितना शोषण कर रहे है /

Saturday, June 26, 2010

एक व्यक्ति

एक व्यक्ति
गोरखपुर चौरा चोरी के हिंसात्मक घटना के बाद महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन स्थगित कर दिया था / अंग्रेजो ने कैदियों को छोड़ा उन कैदी में कि व्यक्ति भी छूटा , जिसके बाल तथा दाढ़ी बढ़ गए थे / जेल से छूटने के बाद कैदी ने आजीवन आपने बाल नहीं कटवाए / वह व्यक्ति एक निष्टावान , सामाज सेवी , आचारवान राजनेता ,एक समर्पनशील देश भक्त ,एक विवेकशील राजनीतिक और एक श्रद्धालू साहित्य सेवी के अतिरिक्त गंभीर विचारवान बना / आगे चल कर वह महात्मा गाँधी का पूरक सहयोगी बना /गाँधी जी के गुणों के करण व्यक्ति को उत्तरप्रदेश का गाँधी कहा जाने लगा / वह व्यक्ति मातृभाषा राष्ट्र प्रेम तथा सहयोग एवम त्याग कि भावना कूट कूट कर भरी हुई थी / महात्मा गाँधी जी व्यक्ति के गुणों के बहुत बड़े प्रशंसक थे / व्यक्ति का हिंदी प्रेम कि मुख्य उपलब्धि हिंदी साहित्य सम्मलेन भी है / सम्मलेन के काम काज को विकसित करने के लिए व्यक्ति ने गांघी जी को भी सम्मलेन का सदस्य बना लिया / कभी कभी व्यक्ति और गाँधी जी में अनेक बात को लेकर मतभेद रहता था / पर इस मतभेद के करण परस्पर संबंधो में कभी कटुता नहीं आई / व्यक्ति ने देश सेवा करते हुए 1 जुलाई 1962 को इस दुनिया को अलविदा कहा पता है वह व्यक्ति कौन था / वह थे राजर्षि पुरूषोत्तम दास टंडन / ऐसे व्यक्ति को हमें नमन करना चाहिए /
सैयद परवेज़

Saturday, April 24, 2010

दुनिया के लोग

लघु कथा

एक महात्मा घूम घूम कर लोगो को धर्म के रह पर चलने का वास्तविक उपदेश दे रहे थे / घूमते घूमते वह एक व्यक्ति के घर पहुंचे / व्यक्ति ने महात्मा को प्रणाम किया / महात्मा ने देखा कि व्यक्ति के तीन बच्चे है / घर भौतिक वादी आधुनिता से और वैशिवक संस्कृति से परिपूर्ण था / महात्मा ने कहा वत्स में धर्म का प्रचारक हूँ / धर्म के शिक्षा फैलाना चाहता हूँ / क्या तुम अपने एक बच्चे तो भी धर्म कि शिक्षा के लिए मेरे आश्रम में भेजोगे / व्यक्ति काफी देर सोचता रहा और अंत में बोला महाराज मेरे छोटे बच्चे को आप धर्म कि शिक्षा दीजिये / महात्मा बोले तुमने इतनी देर तक सोचा और छोटे लडके को ही क्यों चुना ?
व्यक्ति ने कहा महाराज यह लड़का मेरे दोनों लड़को कि तुलना में पढाई में होशियार नहीं है / अध्यापक इसे मूर्ख कहते है / तो मै यह चाहूँगा कि यह धर्म कि शिक्षा ले / महात्मा बोले आज के परिपेक्ष्य में देखा जाए तो आश्चर्य है / लोग अपने मूर्ख लड़को को धार्मिक शिक्षक , धर्म गुरु बनाना चाहते है / उसके विपरीत बुद्धिमान को दुनिया दारी में ही रहने देना चाहते है / क्या विडम्बना है / वत्स खैर मूर्ख भी बुद्धिमान है / बस समझने का अंतर है / जब एक पागल को पूरी दुनिया पागल लगाती है और पागल को दुनिया के लोग जानते हुए भी पागल कहते है / लेकिन दुनिया के लोग यह नहीं जानते कि पागल तो वह है जो प्रक्रति और लोगो के साथ अमानवीय वर्ताव कर रहे होते है / महात्मा मूर्ख बच्चे को स्वीकार करते हुए कहते है यह उन समझदारो से कई गुना बेहतर है जो अपने को समझदार समझाते हुए भी राष्ट्र , मानवता के साथ पागलपन करते है / ऐसे पागलो कि खाश तौर पर भारत में कमी नहीं है /

सैयद परवेज़

Sunday, March 28, 2010

सराय कानून एक्ट १८६७.....

हिंदुस्तान द्वारा प्रकाशित खबर तो होटलों को पिलाना होगा मुफ्त में पानी /उन्होंने वर्तमान सराय कानून १८६७ को अंधेर नगर चौपट रजा से जोड़ का पेश करना वाकई इनकी पूंजीवादी सोच का परिचायक है / मनुष्य शेर का खोल ओड़ ले या शेर मनुष्य का खोल ओड़ ले शेर मनुष्य नहीं बन सकता और न ही मनुष्य शेर बन सकता है / वैसे सराय तो रहे नहीं उनके ही नए चहरे का उदय होटलों के रूप में नज़र आ रहा है लेकिन वजूद सराय का ही है उसे माने या न माने / आज वेशक एक गिलास पानी व भी पूरा भरा नहीं होता एक रूपए में मिलता है जोकि भारतीय सभ्यता संस्कृति के लिए शर्म कि बात है / लेकिन गर्व होता है कि सराय कानून अभी लागू है /लेकिन कितने लोगो कि सराय कानून के बारे में पता है / बड़े बड़े होटलों वाले जो एक कप चाय भी २५-५० रूपए में दे रहे है / सरकार के सामने ही सरेआम उपभोक्तायो को लुटा जा रह है और ऊपर से एक गिलास फ्री में पानी न पिलाना भी शर्म कि बात है / यह तो उस व्यक्ति कि विशेषता है कि जिसने सरकार को जगाया है और आम व्यक्ति को भी सराय कानून के बारे में पता चला है / सरकार सराय एक्ट १८६७ को ख़त्म ना करे / कुछ कानून को परिवर्तन कर सकती है रही बात वेश्य्वृति कि तो कोई भी महिला वेश्यावृति में नहीं आना चाहती है / यह समाज के पूंजीपति वर्ग वाले ही तो पूंजी उछल कर उनका दोहन कर रहे सरकार काली पूंजी वालो पर सख्त कानून लगाये / वजाए सराय एक्ट ख़त्म करने के /

सैयद परवेज़
बदरपुर नई दिल्ली -44

Tuesday, March 23, 2010

दोंग का रूप

बचपन से ही मुझे बुगुर्ग व्यक्तियों से दोस्ती करना अच्छा लगता है / वर्ष २००३ में मैं मोलड बंद विस्तार कालोनी गली संख्या एल २६ में रहने लगा / वहाँ एक बुगुर्ग व्यक्ति सुरेश भारद्वाज से दोस्ती हुई / जोकि अब वह इस दुनिया के कैद खाने से विदा हो चुके है / उनसे मेरा अच्छा तालुकात रहा / जब भी दिखाई देते प्रणाम करता / गली में पानी कि बड़ी समस्या थी / रात -रात भर हम दोनों जाग का टुबेल के वाल को दूसरी गली से बंद करते / पानी प्राप्त करने का समय हमारा रात में ही था / पूरी रात यु ही गुजर जाती कभी पानी मिलाता कभी नहीं / वह नोकरी से रिटायर्ड हो चुके थे / किसी कंपनी में स्टोरकीपर थे / अपने समय के मजदूर यूनियन तथा अपने जीवन के अनुभवो को बताते / राजनीति कि बात होती तो देश के आपातकालीन स्थिति को भी उन्होंने बताया /उनके पास बैठ कर अपनत्व का अनुभव होता था / चाय बनवाते चाय पि जाती और ढेर साड़ी बाते होती / जब उनका निधन हुआ तो मेरे आंसू बंद नहीं हो रहे थे / सगे का संबंथ नहीं था / न ही उन्होंने मुझे कुछ दिया था और न ही मैंने कुछ दिया था / अपने सगे संबंधियों में किसी कि निधन हुआ हो तो मैं इतना नहीं रोया / उनसे मैंने एक महिला के बारे में पुचा था / जिस महिला को मैं थोडा जनता हूँ /वह तथा उसके परिवार का पास पड़ोस से बुरा सम्बन्ध नहीं रहा जो अपने में मस्त ना किसी से लेना और न देना / सन २००४ से मैंने उसके परिवार में बदलाव देखा कि सुबह शाम भजन कीर्तन चालू / मैंने एक अन्य महिला से पुछा था / यह बड़े ही धार्मिक लोग हैं / सुबह शाम भजन कीर्तन अच्छी बात है / अन्य महिला ने बताया कि उस औरत पर देवी का वास है / देवी आती हैं /और लोगो कि समस्यों को हल करती हैं / खैर महिला के यहाँ यह सिलसिला चलता रह और अभी चल रहा है / सायकाल भजन कीर्तन के लिए लोग इकठे होते है और अपनी समस्यों का हल खोजते है तथा चढ़ावा भी चढाते है /मैंने कई बार इस पर आपति भी उठाई लेकिन मुस्लिम होने से डरा कि लोग यही कहेगे कि मुस्लीम है / इसलिये देवी पर विश्वाश नहीं कर रहा / स्वर्गीय सुरेश अंकल ने विश्वाश के चलते ही शायद कुछ नहीं कहा था /मुझे देवी पर विश्वाश है / भगवान् पर विश्वाश है / लेकिन महिला पर देवी आ सकती हैं विश्वास नही / देवी अगर महिला पर आ सकती हैं तो सभी महिला देवी है / उन पर भी तो देवी का वास हमेश होता है / उसी देवी को यही समाज सरे डायन करार दे कर मार भी देता है /देवी कि आड़ में लोग रोजगार चला रहे है / बड़ी विडम्बना है कि समाज पापुलर कल्चर को अपनाते हुए अंधविश्वास को छोड़ना नहीं चाहता है / इसी अंधविश्वास के चलते २० मार्च २०१० कि सायकाल को एक महिला को अपनी जान भी गवानी पड़ी / जान गवई महिला पहले से हार्ट अटैक कि मरीज थी / वह मोलड बंद विस्तार एल २६ में रहती थी / गली के सामने ही देवी वाली महिला का घर है / महिला शाम को उसके घर पूजा करने गई / भजन कीर्तन चालू था / भजन करते करते महिला वेहोश हो गई / वहाँ उपस्थित महिलाये तथा देवी धारण करने वाली महिला ने कहा कि देवी का वास हो गया है / बहुत देर तक होश नहीं आया पानी के छीटे मारी गयी / लगभग एक घंटे तक वही देवी होगे के शक में रोके रखा गया मामला गंभीर लगा तो अस्पताल कि याद आई / जहाँ डॉक्टर ने हार्ट अटैक होने से मारा घोषित कर दिया / अगर समय पर महिला को अस्पताल पंहुचा दिया गया होता तो शायद वह बच जाती / देवी पर्थ अंध विशवास के चलते उसने अपनी जान गवा दी / आवश्यकता है समाज को शिक्षित तथा वैज्ञानिक जागरुक बनाते कि कोई ढोंगी तांत्रिक, डोंगी मोलवी , ढोंगी साधू किसी को सुख समृधि प्राप्त करने के लिए उपाय दे रहा है / ऐसे ही एक मौलवी नोयडा में रहते है / मेरा मानना है सुख समृधि अपनी ईमानदारी कि मेहनत के साथ मानव सेवा है / कोई भी संत भगवान् नहीं है / किसी तांत्रिक देवी धारण करने वाली महिला के पास जाने कि जरूरत नहीं है / आप का कार्य आपकी मेहनत पर निर्भर करता है न कि किसी ढोंगियों के दर्शन से / सरकार ढोंगियों बबयो के खिलाफ सख्त कार्यवाही करे ताकि सकाज को एक नहीं विचार धारा मिल सके और ढोंगी तंत्र समाज से समाप्त हो सके /
सैयद परवेज़

Tuesday, March 2, 2010

सवेंदनशील बनता हरियाणा पुलिस

२४ वे सूरज कुंद मेले में वैसे तो बहुत सी चीजे आकर्षक का केंद्र रही / लेकिन आकर्षण सामाजिक सरोकार से जुड़ा हो तो चार चाँद लग जाते है / इस बार हरियाणा पुलिस अकादमी की ओर से संवेदी पुलिस से दोस्ती पर स्टाल लगा / संवेदी इंचार्ज ( ए एस आई ) राधे श्याम जी ने बताया की इस बार २९ जनवरी से ७ फेब्रुअरी २०१० तक विश्व पुस्तक मेले में भी हमने अपना स्टाल लगवाया हुआ था / हमारी हरियाणा पुलिस का उद्देश्य है की खास तौर पर आम नागरिक पुलिस से दोस्ती करे और अपना मित्र समझे / तभी हम समाज को बेहतर सुरक्षा प्रदान कर सकते है / यह हरियाणा पुलिस आकादमी की देश भर में पहली पहल है / अन्य राज्यों के पोलके को भी आम नागरिको से जोड़ने वाला कार्य करना चाहिए और करते भी होगे / कांस्टेबल संजय कुमार , कुलदीप सिंह , रविंदर सिंह और सीनियर कांस्टेबल ओम प्रकाश / ये सभी पुलिस कर्मी वहां पर लोगो से प्रशनावली भरवा रहे थे / जिसमे समाज से जुडी समस्याए थी और लोगो को समस्याओं का समाधान करने के लिए समझा रहे थे / हरियाणा पुलिस आकादमी समाज से ऋणत्मक पुलिस खौफ को समाप्त करना और अपना मित्र बनाना चाहती है / ताकि आम व्यक्ति भी पुलिस से कंधे से कन्धा मिलकर कार्य कर सके / यह तो बात थी हरियाणा पुलिस प्रशासन की ऐसी हरियाणा पुलिस आकादमी को सलाम और गर्व करना चाहिए / लेकिन प्रश्न उठता है ,क्या पुलिस थानों में भी यह भाई चारे फैलाने वाला कार्य करते है /क्या कोई गरीब, महिला की थानों में ऍफ़ .आई .आर .लिख दी जाती है /सिर्फ मेले में स्टाल लगाने से मामला हल नहीं हो जाता / लेकिन फिर भी सकारात्मक जरूर होगा /क्या हमें नहीं लगता की सूरजकुंड मेला या शहरीकरण का मेला गरीब यानि बी.पी.एल .परिवारों के लिए नहीं होता /वास्तविक तौर पर हरियाणा पुलिस को समाज में पुलिस के प्रति सकारात्मक बदलाव लाना है तो गरीब,दलित ,महिला के साथ हमेश अपने फर्ज का पालन करे / भारतीय कानून का पालन करे / जहाँ धर्म जाति उंच नीच ,धनवान , निर्धन / सभी के साथ पुलिस कानून का पालन करे / तभी इनके मेले का उदेदश्य पूरा होगा और हम गर्व से कहेगे वाह -वाह हरियाणा पुलिस /

सैयद परवेज़